विश्व पुस्तक मेले में हुआ " मन की गठरी " का विमोचन
विश्व पुस्तक मेले में हुआ " मन की गठरी " का विमोचन
होशियारपुर/दलजीत अज्नोहा
हिंदी पंजाबी के प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं राज भाषा हिंदी सलाहकार समिति भारत सरकार के सदस्य डा.धर्मपाल साहिल के नव प्रकाशित लघु कविता संग्रह " मन की मठरी" का विश्व पुस्तक मेले भारत मंडपम् दिल्ली में लोकार्पण हुआ। यह लोकार्पण लब्धप्रतिष्ठ कवि मदन कशयप, कुलदीप शर्मा, सुमित राजोरा, मुकेश, आरिफ़ा (प्रकाशक) एवं अन्य गणमान्य साहिति्यक विभूतियों की उपस्थिति में समपन्न हुआ। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि कुलदीप शर्मा ने कहा कि डॉ. साहिल उपन्यास और कविता दोनों ही विधाओं में बराबर का जादू जगाने में सक्षम हैं। इस नवीनतम् संग्रह की लघु कविताएँ आकार में छोटी होने के बावजूद कम शब्दों के उजाले द्वारा चीजों से अंधेरे का नकाब उतार देती हैं । वह चंद पंक्तियों में जीवन के गूढ़ रहस्यों को उजागर करके पाठक को अभिभूत कर देते हैं। इन कविताओं से लोकगीत जैसी नैसर्गिकता का आभास होता है। लम्बी कविताओं के स्थान पर छोटी और मारक कविताएँ लिखना बहुत श्रम साध्य कर्म है। 12 उपन्यासों के सृजक डॉ. साहिल द्वारा लघु आकार की रचना को उसी महारत से अंज़ाम देना किसी चमत्कार से कम नहीं है।साहिल की इस कृति का दृष्टि दा विज़न मंच होशियारपुर एवं सभ्याचार संभाल सोसाइटी के समूह सदस्यों ने स्वागत किया है।

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